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बीए सेमेस्टर-1 इतिहास

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2022
पृष्ठ :325
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2628
आईएसबीएन :000000000

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बीए सेमेस्टर-1 इतिहास के नवीन पाठ्यक्रमानुसार प्रश्नोत्तर

प्रश्न- राजा भोज के शासन प्रबंध के विषय में आप क्या जानते हैं? बताइए।

अथवा
भोज परमार की सांस्कृतिक उपलब्धियों के बारे में बताइए।
अथवा
भोज परमार के राज्यकाल का विवरण दीजिए।
अथवा
भोज परमार के विजयों का उल्लेख कीजिए।
अथवा
भोज परमार के शासन काल की प्रमुख घटनाओं पर प्रकाश डालिए। भोज परमार काएक शासक के रूप में मूल्यांकन कीजिए

उत्तर-

सिन्धुराज के पश्चात् उसका पुत्र भोज परमार वंश का राजा हुआ। वह परमार वंश का सर्वाधिक महत्वपूर्ण शासक था। उसके शासन काल में परमार राज्य की राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों ही दृष्टियों से अभूतपूर्व प्रगति हुई। भोज के शासनकाल के विषय में सूचना देने वाले आठ अभिलेख मिले हैं। इसमें उदयपुर-प्रशस्ति से उसकी राजनीतिक उपलब्धियों के विषय में जानकारी प्राप्त होती है।

सामरिक उपलब्धियाँ

उसका सर्वप्रथम संघर्ष कल्याणी के चालुक्यों के साथ हुआ। प्रारम्भ में उसे कुछ सफलता मिली तथा गोदावरी के आस-पास का क्षेत्र उसने जीत लिया। इस युद्ध में त्रिपुरी के कलचुरि नरेश गांगेयदेव विक्रमादित्य तथा चोल नरेश राजेन्द्र से भोज को सहायता मिली। कल्वन लेख जो भोज के सामंत यशोवर्मा का है, से सूचित होता है कि उसने कर्णाट, लाट तथा कोंकण को जीता था। ऐसा प्रतीत होता है कि उसने कर्णाट से होकर ही कोंकण को जीता था जिसमें चालुक्य साम्राज्य के उत्तर का गोदावरी का समीपवर्ती भाग उसके अधिकार में आ गया था। उसके लेखों से इसकी सूचना मिलती है। बेलगाँव लेख में बताया गया है कि 'वह भोज रूप कमल के लिए चन्द्र के समान था। मीराज लेख से पता चलता है कि उसने कोंकण नरेश की समस्त सम्पत्ति छीन लिया तथा कोल्हापुर में सैनिक शिविर लगाकर उत्तर-भारत की विजय के निमित्त योजनाएँ तैयार किया था। परन्तु चालुक्य नरेश जयसिंह द्वितीय ने उसे हटा दिया।

भोज ने लाट के शासक कीर्तिराज पर आक्रमण किया। वह पराजित हुआ और आत्मसमर्पण करने को बाध्य हुआ। भोज के सामंत यशोवर्मा का कल्वन से प्राप्त लेख लाट प्रदेश पर उसके अधिकार की पुष्टि करता है। ऐसा लगता है कि कीर्तिवर्मा को हराकर भोज ने यशोवर्मा को लाट का शासक बनाया था। ज्ञात होता है कि वह भोज की ओर से नासिक में 1500 ग्रामों पर शासन करता था। लाट को जीतने के बाद उसने कोंकण प्रदेश की विजय की जहाँ शिलाहार वंश का शासन था। किन्तु कोंकण पर उसकी विजय स्थायी नहीं हुई तथा शीघ्र ही चालुक्य नरेश जयसिंह द्वितीय ने वहाँ अपना अधिकार कर लिया। मीराज लेख से सूचना मिलती है कि उसने कोंकण नरेश को पराजित कर इसकी सारी सम्पत्ति छीन लिया था। भोज ने उड़ीसा की भी विजय की थी। यहाँ का शासक इन्द्ररथ था। उसकी राजधानी आदिनगर में थी। इन्द्ररथ का उल्लेख चोल शासक राजेन्द्र के तिरूमलै लेखों में भी मिलता है। कुछ विद्वानों के अनुसार उसी के सहयोग से भोज ने इन्द्ररथ को जीता होगा। उदयपुर तथा कल्वन लेखों से सूचना मिलती है कि भोज ने चेदि वंश के राजा को जीता था। यह पराजित नरेश गांगेयदेव रहा होगा जो भोज का समकालीन था। पहले गांगेयदेव तथा भोज के बीच मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध थे। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिहार क्षेत्रों पर अधिकार को लेकर दोनों में अनबन हो गयी तथा भोज ने उसे पराजित कर खुशियाँ मनायी

कोंकण विजय के पश्चात् अपने दक्षिणी अभियान को कुछ विराम देकर भोज ने उत्तर की ओर ध्यान दिया। उदयपुर-प्रशस्ति में इसकी तोग्गल तथा तुरुष्कों के विरुद्ध सफलता का उल्लेख किया गया है। तोग्गल सम्भवतः महमूद गजनवी का कोई सिपहसालार था और तुरुष्क किसी सैनिक टुकड़ी का नायक था। मुसलमान इतिहासकार अलगर्दिजी के अनुसार महमूद गजनवी ने सोमनाथ पर आक्रमण कर उसे बुरी तरह लूटा-पाटा। पर लौटते समय जब उसे यह मालूम हुआ कि राजा परमदेव, जो भारतीय राजाओं में सबसे बड़ा है, ने उसका रास्ता रोक रखा है, तो उसने अपना मार्ग बदल दिया। यद्यपि इस परमदेव को कुछ लोग चन्देल विद्याधर से, कुछ चालुक्य प्रथम भीम से, कुछ आबू के किसी परमार शासक से तथा कुछ साभर के चाहमान वीर्य रामदेव से समीकृत करते हैं, पर प्रतिपाल भाटिया इसे भोज से समीकृत करने के पक्ष में है किन्तु उल्लेखनीय है कि भोज का महमूद गजनवी से सीधा संघर्ष नहीं हुआ। महमूद ने संघर्ष को सर्वथा टालने की कोशिश की थी। उदयपुर-प्रशस्तिकार ने इसे ही भोज के विजयों के रूप में स्वीकार कर लिया है।

जिस समय भोज मालवा में अपने साम्राज्य का विस्तार कर रहा था, उसी समय बुन्देलखण्ड में चन्देल भी अपनी सत्ता सुदृढ़ करने में लगे हुए थे। भोज का समकालीन चन्देल सम्राट विद्याधर उससे बढ़कर महत्वाकांक्षी एवं पराक्रमी ग्वालियर तथा दूबकुण्ड में उसके कछवाहा वंशी सामंत शासन करते थे। ऐसी स्थिति में दोनों के बीच संघर्ष अनिवार्य था। ऐसा प्रतीत होता है कि भोज विद्याधर की बढ़ती हुई शक्ति के आगे मजबूर हो गया तथा उसके सामंतों से उसे पराजित भी होना पड़ा। चन्देल वंश के एक लेख में कहा गया है कि "कलचुरि चन्द्र तथा भोज विद्याधर की गुरु के समानपूजा करते थे"। यह ज्ञात नहीं है कि भोज तथा विद्याधर में सीधा संघर्ष हुआ अथवा उसने बिना युद्ध के ही चन्देल नरेश की प्रभुता मान ली। गांगुली का विचार है कि भोज ने विद्याधर के ऊपर आक्रमण किया तथा पराजित हुआ था। किन्तु इस विषय लेख में हम निश्चित रूप से कुछ भी नहीं कह सकते। ग्वालियर के कछवाहा शासक महीपाल के सास-बहू से पता चलता है कि कछवाहा सामंत कीर्तिराज ने भोज की सेनाओं को हराया था। संभव है उसे अपने स्वामी विद्याधर से सहायता मिली हो। किन्तु विद्याधर की मृत्यु के बाद चन्देल शक्ति निर्बल पड़ गयी जिससे कछवाहों ने भोज की अधीनता स्वीकार कर ली।

मालवा के पश्चिमोत्तर में चाहमानों का राज्य था। भोज का उनके साथ भी संघर्ष हुआ। पृथ्वीराज विजय से सूचना मिलती है कि भोज ने चाहमान शासक वीर्यराम को पराजित कर कुछ समय के लिए ने पुनः शाकम्भरी के ऊपर अपना अधिकार कर लिया। किन्तु वीर्यराम के उत्तराधिकारी चामुण्डराज शाकम्भरी पर अधिकार कर लिया। इस युद्ध में परमारों का सेनापति साढ़ मार डाला गया।

मेरुतुंग के प्रबन्ध चिंतामणि से पता चलता है कि भोज ने चालुक्य नरेश भीम पर आक्रमण करने के लिए अपने जैन सेनानायक कुलचन्द्र के नेतृत्व में एक सेना भेजी। इस समय भीम सिन्ध अभियान पर निकला हुआ था। कुलचन्द्र ने उसकी राजधानी अन्हिलवाड़ को लूटा। उदयपुर लेख में कहा गया है कि भोज ने अपने भृत्यों के माध्यम से भीम पर विजय पायी थी। इस प्रकार भोज ने अपने समकालीन कई शक्तियों को पराजित कर एक विशाल एवं सुदृढ़ साम्राज्य स्थापित कर लिया।

भोज की अतिशय महत्वाकांक्षा और युद्धप्रियता ही अन्ततः उसके पतन का कारण सिद्ध हुई। ऐसा ज्ञात होता है कि अपने जीवन के अंतिम दिनों में भोज अपने साम्राज्य की रक्षा नहीं कर सका तथा उसे भारी असफलताओं का सामना करना पड़ा। सर्वप्रथम चालुक्य नरेश सोमेश्वर प्रथम ने उसकी राजधानी धारा पर आक्रमण किया। भोज पराजित हुआ तथा भाग खड़ा हुआ। चालुक्यों ने उसकी राजधानी को खूब लूटा। आक्रमणकारियों ने धारा नगरी को जला दिया। सोमेश्वर के इस विजय की चर्चा नगाई लेख में मिलती है। विल्हण कृत 'विक्रमांकदेवचरित' से भी इसकी पुष्टि होती है जिसमें कहा गया है कि भोज ने भाग कर अपनी जीवन-रक्षा की। आक्रमणकारियों के लौट जाने के बाद ही वह अपनी राजधानी पर अधिकार कर सका। भोज के शासन काल के अन्त में चालुक्यों तथा चेदियों ने उसके विरुद्ध एक संघ बनाया। इस संघ ने भोज की राजधानी पर आक्रमण किया। इस आक्रमण का नेता कलचुरि नरेश लक्ष्मीकर्ण था। भोज चिन्ता में बीमार पड़ा और अन्ततः उसकी मृत्यु हो गयी। उसके मरते ही कर्ण धारा पर टूट पड़ा तथा लूट-पाट कर प्रचुर सम्पत्ति अपने साथ लेता गया। चालुक्य भीम ने भी दूसरी ओर से धारा पर आक्रमण कर उसे ध्वस्त कर दिया। इस प्रकार परमार साम्राज्य का अन्त हो गया।

राजा भोज की सांस्कृतिक उपलब्धियाँ राजनीतिक उपलब्धियों से अधिक हैं। वह स्वयं विद्वान तथा विद्वानों का उदार संरक्षक था। उसने विविध विषयों से सम्बन्धित अनेक ग्रन्थों की रचना की थी।

-सरस्वती कण्ठाभरण, शृंगार प्रकाश, प्राकृत-व्याकरण, पातजलियोग सूत्र वृत्ति, कूर्मशतक, चम्पूरामायण, शृंगारमंजरी कथा, तत्व प्रकाश, भुजबल-निबन्ध, राजमृगांक, आयुर्वेद सर्वस्व, नाममालिका, शब्दानुशासन, समरांगण सूत्रधार, कृत्यकल्पतरु, विद्याविनोद, व्यवहार समुच्चय आदि विशेष रूप  से उल्लेखनीय हैं। यद्यपि वर्तमान समय में यह नहीं कहा जा सकता कि ये सभी रचनाएँ भोज की अपनी कृति हैं।

स्वयं विद्वान एवं कवि होने के साथ-साथ भोज विद्वानों का उदार संरक्षक भी था। राजतरंगिणी ने भोज के लिए कविबान्धव पदवी का प्रयोग किया गया है। अपने दान के लिए भी भोज व्याख्यात् थे। एक श्लोक के लिए एक लाख मुद्राएं दान दिया करते थे। दामोदर मिश्र तथा धनपाल इनके समकालीन तथा आश्रित कवियों में थे। भोज के सम्बन्ध में किसी कवि का यह कथन कि “भोजराज के दिवंगत हो जाने पर आज धारा निराधार हो गई है, सरस्वती निरालम्ब हो गयी है और सभी विद्वान अपने आश्रय से टूट गये हैं।"

भोज एक महान् निर्माता भी था। अनेक मंदिरों का निर्माण करवाया इनमें केदारेश्वर, रामेश्वर, सोमनाथ आदि। धारा नगरी में स्थिति शारदा सदन मंदिर के साथ-साथ विद्यास्थान भी था। इसे सरस्वती सदन तथा भोजशाला नाम से भी प्रसिद्धि मिली। इसने भोजपुर नामक नगर की स्थापना की थी तथा भोजसर नामक सरोवर बनवाया था।

इस प्रकार भोज की गणना प्राचीन भारत के उन महान शासकों में की जाती है जो विजेता एवं साम्राज्य निर्माता के साथ-साथ कला एवं संस्कृति के उदार संरक्षक भी थे।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- ऐतिहासिक युग के इतिहास पर प्रकाश डालिए।
  2. प्रश्न- सिन्धु घाटी सभ्यता का परिचय दीजिए व भारत में उसके बाद विकसित होने वाली सभ्यता व संस्कृति को चित्रित कीजिए।
  3. प्रश्न- भारत के प्रख्यात इतिहाकार कल्हण व आर. सी. मजूमदार का परिचय दीजिए।
  4. प्रश्न- भारतीय ज्ञान प्रणाली के स्रोत पर प्रकाश डालिए।
  5. प्रश्न- जदुनाथ सरकार, वी. डी. सावरकर, के. पी. जायसवाल का परिचय दीजिए।
  6. प्रश्न- भारत के प्रख्यात इतिहासकार मृदुला मुखर्जी के बारे में बताइए।
  7. प्रश्न- भारत संस्कृति (भाषाओं) के ज्ञान से अवगत कराइये।
  8. प्रश्न- नृत्य व रंगमंच की भारतीय संस्कृति से अवगत कराइये।
  9. प्रश्न- सिन्धु घाटी सभ्यता से मगध राज्य तक पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  10. प्रश्न- भारत के प्रख्यात इतिहासकार विपिनचन्द्र पर टिप्पणी लिखिए।
  11. प्रश्न- मध्य पाषाण समाज और शिकारी संग्रहकर्ता पर टिप्पणी कीजिए।
  12. प्रश्न- ऊपरी पुरापाषाण क्रांति क्या थी?
  13. प्रश्न- प्रसिद्ध इतिहासकार रोमिला थापर पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
  14. प्रश्न- पाषाण युग की जीवनशैली किस प्रकार की थी?
  15. प्रश्न- के. पी. जायसवाल के विशिष्ट कार्यों से अवगत कराइये।
  16. प्रश्न- वी. डी. सावरकर के धार्मिक और राजनीतिक विचार से अवगत कराइये।
  17. प्रश्न- लोअर पैलियोलिथिक पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  18. प्रश्न- सिन्धु घाटी सभ्यता के विषय में आप क्या समझते हैं? 'हड़प्पा संस्कृति' के निर्माता कौन थे? बाह्य देशों के साथ उनके सम्बन्धों के विषय में आप क्या समझते हैं?
  19. प्रश्न- सिन्धु घाटी सभ्यता के सामाजिक व्यवस्था का वर्णन कीजिए।
  20. प्रश्न- सिन्धु घाटी सभ्यता के लोगों के आर्थिक जीवन के विषय में विस्तारपूर्वक बताइये।
  21. प्रश्न- सिन्धु नदी घाटी के समाज के धार्मिक व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
  22. प्रश्न- सिन्धु घाटी सभ्यता की राजनीतिक व्यवस्था एवं कला का विस्तार पूर्वक वर्णन कीजिए।
  23. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता के नामकरण और उसके भौगोलिक विस्तार की विवेचना कीजिए।
  24. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता की नगर योजना का विस्तृत वर्णन कीजिए।
  25. प्रश्न- हड़प्पा सभ्यता के नगरों के नगर-विन्यास पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
  26. प्रश्न- हड़प्पा संस्कृति की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  27. प्रश्न- सिन्धु घाटी के लोगों की शारीरिक विशेषताओं का संक्षिप्त मूल्यांकन कीजिए।
  28. प्रश्न- पाषाण प्रौद्योगिकी पर टिप्पणी लिखिए।
  29. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता के सामाजिक संगठन पर टिप्पणी कीजिए।
  30. प्रश्न- सिंधु सभ्यता के कला और धर्म पर टिप्पणी कीजिए।
  31. प्रश्न- सिंधु सभ्यता के व्यापार का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
  32. प्रश्न- सिंधु सभ्यता की लिपि पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
  33. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता में शिवोपासना पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  34. प्रश्न- सैन्धव धर्म में स्वस्तिक पूजा के विषय में बताइये।
  35. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता के विनाश के क्या कारण थे?
  36. प्रश्न- लोथल के 'गोदी स्थल' पर लेख लिखो।
  37. प्रश्न- मातृ देवी की उपासना पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  38. प्रश्न- 'गेरुए रंग के मृदभाण्डों की संक्षिप्त विवेचना कीजिए।
  39. प्रश्न- 'मोहन जोदडो' का महान स्नानागार' पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  40. प्रश्न- ऋग्वैदिक अथवा पूर्व-वैदिक काल की सभ्यता और संस्कृति के बारे में आप क्या जानते हैं?
  41. प्रश्न- विवाह संस्कार से सम्पादित कृतियों का वर्णन कीजिए तथा महत्व की व्याख्या कीजिए।
  42. प्रश्न- वैदिक कालीन समाज पर प्रकाश डालिए।
  43. प्रश्न- उत्तर वैदिककालीन समाज में हुए परिवर्तनों की व्याख्या कीजिए।
  44. प्रश्न- वैदिक कालीन समाज की प्रमुख विशेषताओं का निरूपण कीजिए।
  45. प्रश्न- वैदिक साहित्य के बारे में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  46. प्रश्न- ब्रह्मचर्य आश्रम के कार्य व महत्व को समझाइये।
  47. प्रश्न- वानप्रस्थ आश्रम के महत्व को समझाइये।
  48. प्रश्न- सन्यास आश्रम का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  49. प्रश्न- मनुस्मृति में लिखित विवाह के प्रकार लिखिए।
  50. प्रश्न- वैदिक काल में दास प्रथा का वर्णन कीजिए।
  51. प्रश्न- पुरुषार्थ पर लघु लेख लिखिए।
  52. प्रश्न- 'संस्कार' पर प्रकाश डालिए।
  53. प्रश्न- गृहस्थ आश्रम के महत्व को समझाइये।
  54. प्रश्न- महाकाव्यकालीन स्त्रियों की दशा पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  55. प्रश्न- उत्तर वैदिककालीन स्त्रियों की दशा पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  56. प्रश्न- वैदिककाल में विवाह तथा सम्पत्ति अधिकारों की क्या स्थिति थी?
  57. प्रश्न- उत्तर वैदिककाल की राजनीतिक दशा का उल्लेख कीजिए।
  58. प्रश्न- विदथ पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  59. प्रश्न- ऋग्वेद पर टिप्पणी कीजिए।
  60. प्रश्न- आर्यों के मूल स्थान पर प्रकाश डालिए।
  61. प्रश्न- 'सभा' के विषय में आप क्या जानते हैं?
  62. प्रश्न- वैदिक यज्ञों के सम्पादन में अग्नि के महत्त्व को व्याख्यायित कीजिए।
  63. प्रश्न- उत्तरवैदिक कालीन धार्मिक विश्वासों एवं कृत्यों के विषय में आप क्या जानते हैं?
  64. प्रश्न- बिम्बिसार के समय से नन्द वंश के काल तक मगध की शक्ति के विकास का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  65. प्रश्न- नन्द कौन थे? महापद्मनन्द के जीवन तथा उपलब्धियों का उल्लेख कीजिए।
  66. प्रश्न. बिम्बिसार की राज्यनीति का वर्णन कीजिए तथा परिचय दीजिए।
  67. प्रश्न- उदयिन के जीवन पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  68. प्रश्न- नन्द साम्राज्य की विशालता का वर्णन कीजिए।
  69. प्रश्न- धननंद और कौटिल्य के सम्बन्ध का उल्लेख कीजिए।
  70. प्रश्न- धननंद के विषय में आप क्या जानते हैं?
  71. प्रश्न- मगध की भौगोलिक सीमाओं को स्पष्ट कीजिए।
  72. प्रश्न- मौर्य कौन थे? इस वंश के इतिहास जानने के स्रोतों का उल्लेख कीजिए तथा महत्व पर प्रकाश डालिए।
  73. प्रश्न- चन्द्रगुप्त मौर्य के विषय में आप क्या जानते हैं? उसकी उपलब्धियों और शासन व्यवस्था पर निबन्ध लिखिए।
  74. प्रश्न- सम्राट बिन्दुसार का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
  75. प्रश्न- मौर्यकाल में सम्राटों के साम्राज्य विस्तार की सीमाओं को स्पष्ट कीजिए।
  76. प्रश्न- चन्द्रगुप्त मौर्य के बचपन का वर्णन कीजिए।
  77. प्रश्न- सुदर्शन झील पर टिप्पणी लिखिए।
  78. प्रश्न- अशोक के प्रारम्भिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताइये कि वह किस प्रकार सिंहासन पर बैठा था?
  79. प्रश्न- सम्राट अशोक के साम्राज्य विस्तार पर प्रकाश डालिए।
  80. प्रश्न- सम्राट के धम्म के विशिष्ट तत्वों का निरूपण कीजिए।
  81. प्रश्न- अशोक के शासन व्यवस्था की विवेचना कीजिए।
  82. प्रश्न- 'भारतीय इतिहास में अशोक एक महान सम्राट कहलाता है। यह कथन कहाँ तक सत्य है? प्रकाश डालिए।
  83. प्रश्न- मौर्य वंश के पतन के लिए अशोक कहाँ तक उत्तरदायी था?
  84. प्रश्न- अशोक ने धर्म प्रचार के क्या उपाय किये थे? स्पष्ट कीजिए।
  85. प्रश्न- सारनाथ स्तम्भ लेख पर टिप्पणी कीजिए।
  86. प्रश्न- बृहद्रथ किस राजवंश का शासक था और इसके विषय में आप क्या जानते हैं?
  87. प्रश्न- कौटिल्य और मेगस्थनीज के विषय में आप क्या जानते हैं?
  88. प्रश्न- कौटिल्य की पुस्तक 'अर्थशास्त्र' में उल्लेखित विषयों की व्याख्या कीजिए।
  89. प्रश्न- कौटिल्य रचित 'अर्थशास्त्र' में 'कल्याणकारी राज्य' की परिकल्पना को स्पष्ट कीजिए।
  90. प्रश्न- गुप्तों की उत्पत्ति के विषय में आप क्या जानते हैं? विस्तृत विवेचन कीजिए।
  91. प्रश्न- काचगुप्त कौन थे? स्पष्ट कीजिए।
  92. प्रश्न- प्रयाग प्रशस्ति के आधार पर समुद्रगुप्त की विजयों का उल्लेख कीजिए।
  93. प्रश्न- चन्द्रगुप्त (द्वितीय) की उपलब्धियों के बारे में विस्तार से लिखिए।
  94. प्रश्न- कल्याणी के उत्तरकालीन पश्चिमी चालुक्य को समझाइए।
  95. प्रश्न- गुप्त शासन प्रणाली पर एक विस्तृत लेख लिखिए।
  96. प्रश्न- गुप्तकाल की साहित्यिक एवं कलात्मक उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
  97. प्रश्न- गुप्तों के पतन का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  98. प्रश्न- गुप्तों के काल को प्राचीन भारत का 'स्वर्ण युग' क्यों कहते हैं? विवेचना कीजिए।
  99. प्रश्न- रामगुप्त की ऐतिहासिकता पर विचार व्यक्त कीजिए।
  100. प्रश्न- गुप्त सम्राट चन्द्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के विषय में बताइए।
  101. प्रश्न- आर्यभट्ट कौन था? वर्णन कीजिए।
  102. प्रश्न- राजा के रूप में स्कन्दगुप्त के महत्व की विवेचना कीजिए।
  103. प्रश्न- कुमारगुप्त पर संक्षेप में टिप्पणी लिखिए।
  104. प्रश्न- कुमारगुप्त प्रथम की उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए।
  105. प्रश्न- गुप्तकालीन भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान पर प्रकाश डालिए।
  106. प्रश्न- कालिदास पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  107. प्रश्न- विशाखदत्त कौन था? वर्णन कीजिए।
  108. प्रश्न- स्कन्दगुप्त कौन था?
  109. प्रश्न- जूनागढ़ अभिलेख से किस राजा के विषय में जानकारी मिलती है उसके विषय में आपसूक्ष्म में बताइए।
  110. प्रश्न- गुर्जर प्रतिहारों की उत्पत्ति का आलोचनात्मक विवरण दीजिए।
  111. प्रश्न- मिहिरभोज की उपलब्धियों का मूल्यांकन कीजिए।
  112. प्रश्न- गुर्जर-प्रतिहार नरेश नागभट्ट द्वितीय के शासनकाल की घटनाओं पर प्रकाश डालिए।
  113. प्रश्न-
  114. प्रश्न- गुर्जर-प्रतिहार शासक नागभट्ट प्रथम के शासन-काल का विवरण दीजिए।
  115. प्रश्न- वत्सराज की उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए।
  116. प्रश्न- गुर्जर-प्रतिहार वंश के इतिहास में नागभट्ट द्वितीय के स्थान का मूल्यांकन कीजिए।
  117. प्रश्न- मिहिरभोज की राजनैतिक एवं सांस्कृतिक उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
  118. प्रश्न- गुर्जर-प्रतिहार सत्ता का मूल्यांकन कीजिए।
  119. प्रश्न- गुर्जर प्रतिहारों का विघटन पर प्रकाश डालिये।
  120. प्रश्न- गुर्जर-प्रतिहार वंश के इतिहास जानने के साधनों का उल्लेख कीजिए।
  121. प्रश्न- महेन्द्रपाल प्रथम कौन था? उसकी उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए। उत्तर -
  122. प्रश्न- राजशेखर और उसकी कृतियों पर एक टिप्पणी लिखिए।
  123. प्रश्न- राज्यपाल तथा त्रिलोचनपाल पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  124. प्रश्न- त्रिकोणात्मक संघर्ष में प्रतिहारों की भूमिका का उल्लेख कीजिए।
  125. प्रश्न- कन्नौज के प्रतिहारों पर एक निबन्ध लिखिए।
  126. प्रश्न- प्रतिहार वंश का महानतम शासक कौन था?
  127. प्रश्न- गुर्जर एवं पतन का विश्लेषण कीजिये।
  128. प्रश्न- कीर्तिवर्मा द्वितीय एवं बादामी के चालुक्यों के अन्त पर प्रकाश डालिए।
  129. प्रश्न- चालुक्य राज्य के अंधकार काल पर प्रकाश डालिए।
  130. प्रश्न- पूर्वी चालुक्य शासकों ने कला और संस्कृति में क्या योगदान दिया है?
  131. प्रश्न- चालुक्य कौन थे? इनकी उत्पत्ति के बारे में बताइए।
  132. प्रश्न- वेंगी के पूर्व चालुक्यों पर टिप्पणी लिखिए।
  133. प्रश्न- चालुक्यकालीन धर्म एवं कला का वर्णन कीजिए।
  134. प्रश्न- चालुक्यों की विभिन्न शाखाओं का वर्णन कीजिए।
  135. प्रश्न- चालुक्य संघर्ष के विषय में आप क्या जानते हैं?
  136. प्रश्न- कल्याणी के पश्चिमी चालुक्यों की शक्ति के प्रसार का विवरण दीजिए।
  137. प्रश्न- चालुक्यों की उपलब्धियों के महत्व का वर्णन कीजिए।
  138. प्रश्न- चालुक्यों की शासन व्यवस्था का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  139. प्रश्न- चालुक्य- पल्लव संघर्ष का विवरण दीजिए।
  140. प्रश्न- परमारों की उत्पत्ति की विवेचना कीजिए।
  141. प्रश्न- राजा भोज के शासन काल में चतुर्दिक उन्नति हुई।
  142. प्रश्न- परमार नरेश वाक्पति II मुंज के शासन काल की घटनाओं पर प्रकाश डालिए।
  143. प्रश्न- राजा भोज के शासन प्रबंध के विषय में आप क्या जानते हैं? बताइए।
  144. प्रश्न- परमार वंश के पतन पर प्रकाश डालिए तथा इस वंश का पतन क्यों हुआ?
  145. प्रश्न- परमार साहित्य और कला की विवेचना कीजिए।
  146. प्रश्न- परमार वंश का संस्थापक कौन था?
  147. प्रश्न- मुंज परमार की उपलब्धियों का आंकलन कीजिए।
  148. प्रश्न- 'धारा' पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  149. प्रश्न- सीयक द्वितीय 'हर्ष' के शासन काल की घटनाओं का उल्लेख कीजिए।
  150. प्रश्न- सिन्धुराज पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  151. प्रश्न- परमारों के पतन के कारण बताइए।
  152. प्रश्न- राजा भोज एवं चालुक्य संघर्ष का वर्णन कीजिये।
  153. प्रश्न- राजा भोज की सांस्कृतिक उपलब्धियों की विवेचना कीजिए।
  154. प्रश्न- परमार इतिहास जानने के साधनों का वर्णन कीजिए।
  155. प्रश्न- भोज परमार की उपलब्धियों का उल्लेख कीजिए।
  156. प्रश्न- परमारों की प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रकाश डालिये।
  157. प्रश्न- विग्रहराज चतुर्थ के शासन काल की घटनाओं का उल्लेख कीजिए।
  158. प्रश्न- अर्णोराज चाहमान के जीवन एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए।
  159. प्रश्न- पृथ्वीराज चौहान की उपलब्धियों की समीक्षा कीजिए। मोहम्मद गोरी के हाथों उसकी पराजय के क्या कारण थे? उल्लेख कीजिए।
  160. प्रश्न- चाहमान कौन थे? विग्रहराज चतुर्थ के विजयों का वर्णन कीजिए।
  161. प्रश्न- चाहमान कौन थे?
  162. प्रश्न- विग्रहराज द्वितीय के शासनकाल की घटनाओं पर प्रकाश डालिए।
  163. प्रश्न- अजयराज चाहमान की उपलब्धियों पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
  164. प्रश्न- पृथ्वीराज चौहान की सैनिक उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
  165. प्रश्न- विग्रहराज चतुर्थ की उपलब्धियों का मूल्यांकन कीजिए।
  166. प्रश्न- पृथ्वीराज और जयचन्द्र की शत्रुता पर प्रकाश डालिये।
  167. प्रश्न- ऐतिहासिक साक्ष्य के रूप में पृथ्वीराज रासो के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
  168. प्रश्न- चाहमान वंश का प्रसिद्ध शासक आप किसे मानते हैं?
  169. प्रश्न- चाहमानों के विदेशी मूल का सिद्धान्त पर प्रकाश डालिये।
  170. प्रश्न- पृथ्वीराज तृतीय के चन्देलों के साथ सम्बन्धों की विवेचना कीजिए।
  171. प्रश्न- गोविन्द चन्द्र गहड़वाल की उपलब्धियों का मूल्यांकन कीजिए।
  172. प्रश्न- गहड़वालों की उत्पत्ति की विवेचना कीजिए।
  173. प्रश्न- जयचन्द्र पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  174. प्रश्न- अर्णोराज के राज्यकाल की प्रमुख राजनीतिक घटनाओं पर प्रकाश डालिए।
  175. प्रश्न- चाहमानों (चौहानों) के राजनीतिक इतिहास का वर्णन कीजिए।
  176. प्रश्न- ललित विग्रहराज नाटक पर नोट लिखिए।
  177. प्रश्न- चाहमान नरेश पृथ्वीराज तृतीय के तराइन युद्धों का वर्णन कीजिए।
  178. प्रश्न- चौहान वंश के इतिहास जानने के स्रोतों का वर्णन कीजिए।
  179. प्रश्न- सामंतवाद पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
  180. प्रश्न- सामंतवाद के पतन के कारण बताइए।
  181. प्रश्न- प्राचीन भारत में सामंतवाद की क्या स्थिति थी?
  182. प्रश्न- मौर्य प्रशासन और सामंतवाद पर टिप्पणी लिखिए।
  183. प्रश्न-
  184. प्रश्न- वेदों की उत्पत्ति के विषय में बताइए। वेदों ने हमारे जीवन को किस प्रकार के ज्ञान दिये?
  185. प्रश्न- हिन्दू धर्म और संस्कृति पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए
  186. प्रश्न- हिन्दू वर्ग की जाति-व्यवस्था व त्योहारों के विषय में बताइए।
  187. प्रश्न- 'लिंगायत'' के बारे में बताइए।
  188. प्रश्न- हिन्दू धर्म के सुधारकों के विषय में बताइए।
  189. प्रश्न- हिन्दू धर्म में आत्मा से सम्बन्धित विचारों से अवगत कराइये।
  190. प्रश्न- हिन्दुओं के मूल विश्वासों से अवगत कराइए।
  191. प्रश्न- उपवास पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  192. प्रश्न- हिन्दू धर्म में लोगों के गाय के प्रति कर्तव्य से अवगत कराइये।
  193. प्रश्न- हिन्दू धर्म में
  194. प्रश्न- मुहम्मद गोरी के भारत आक्रमण का वर्णन कीजिए।
  195. प्रश्न- मुहम्मद गोरी की भारत विजय के कारणों की सुस्पष्ट व्याख्या कीजिए।
  196. प्रश्न- राजपूतों के पतन के कारणों की विवेचना कीजिए।
  197. प्रश्न- मुस्लिम आक्रमण के समय उत्तर की राजनीतिक स्थिति का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए।
  198. प्रश्न- महमूद गजनवी के भारतीय आक्रमणों का वर्णन कीजिए।
  199. प्रश्न- भारत पर मुहम्मद गोरी के आक्रमण के क्या कारण थे?
  200. प्रश्नृ- गोरी के आक्रमण के समय भारत की राजनीतिक दशा कैसी थी?
  201. प्रश्न- गोरी के आक्रमण के समय भारत की सामाजिक स्थिति का संक्षिप्त वर्णन करें।
  202. प्रश्न- 11-12वीं सदी में भारत की आर्थिक स्थिति पर टिप्पणी लिखें।
  203. प्रश्न- 11-12वीं सदी में भारतीय शासकों के तुर्कों से पराजय के क्या कारण थे?
  204. प्रश्न- भारत में तुर्की राज्य स्थापना के क्या परिणाम हुए?
  205. प्रश्न- मुहम्मद गोरी का चरित्र-मूल्यांकन कीजिए।
  206. प्रश्न- अरबों की असफलता के क्या कारण थे?
  207. प्रश्न- अरब आक्रमण का प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
  208. प्रश्न- तराइन के प्रथम युद्ध पर प्रकाश डालिए।
  209. प्रश्न- भारत पर तुर्कों के आक्रमण के क्या कारण थे?
  210. प्रश्न- महमूद गजनवी का आनन्दपाल पर आक्रमण का वर्णन कीजिये।
  211. प्रश्न- महमूद गजनवी का कन्नौज पर आक्रमण पर प्रकाश डालिये।
  212. प्रश्न- महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ का विध्वंस पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये। [
  213. प्रश्न- महमूद गजनवी के आक्रमण के कारणों का उल्लेख कीजिए।
  214. प्रश्न- भारत पर महमूद गजनवी के आक्रमण के परिणामों पर टिप्पणी कीजिए।
  215. प्रश्न- मोहम्मद गोरी की विजयों के बारे में लिखिए।
  216. प्रश्न- भारत पर तुर्की आक्रमण के प्रभावों का संक्षिप्त उल्लेख कीजिए।

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